Moral Story: समझौता और कड़ी मेहनत का मोल
एक उच्च शिक्षा प्राप्त युवक एक बड़ी कम्पनी में नौकरी के लिये गया। वह पहले साक्षात्कार में सफल हो गया। कम्पनी के निर्देशक ने उसे अन्तिम साक्षात्कार के लिए बुलाया। युवक एक प्रतिभाशाली छात्र रहा था।
एक उच्च शिक्षा प्राप्त युवक एक बड़ी कम्पनी में नौकरी के लिये गया। वह पहले साक्षात्कार में सफल हो गया। कम्पनी के निर्देशक ने उसे अन्तिम साक्षात्कार के लिए बुलाया। युवक एक प्रतिभाशाली छात्र रहा था।
एक दिन टीटा और डोगो दोनों आपस में बातें कर रहे थे, टीटा बोल रहा था की मैं अपने स्कूल में 100 मीटर रेस में फर्स्ट आया हूँ मैं बहुत तेज़ दौड़ सकता हूँ। इसपर डोगो बोलता है की टीटा ऐसा नहीं है मैं तुमसे भी तेज़ दौड़ सकता हूँ।
एक दिन मोटू बाजार से घर लौट रहा था, तभी रास्ते में कुछ बच्चे उसकी नक़ल करने लगते हैं। यह देखकर मोटू उदास हो जाता है उसको लगता है की वे बच्चे उसका मज़ाक उड़ा रहे हैं। यही सोचते सोचते वो घर की तरफ चलता है।
किसी दूर गाँव में एक धोबी रहता था। धोबी रोज़ लोगों के घर-घर जाता और लोगों के गंदे कपड़े धोने के लिए लेकर आता था। धोबी के पास एक गधा था जिस पर वो कपड़े लादकर लाया और ले जाया करता था।
बहादुर सिंह गाँव के संपन्न किसानों में से एक थे। भरा पूरा घर था, किसी चीज़ की कमी ना थी। कमी थी तो बस एक चीज की, भगवान ने जितना दिया उससे कभी खुश नहीं रहते थे। बहादुर सिंह को हमेशा भगवान से यही शिकायत रहती थी।
एक राजा था, उसका एक बड़ा-सा राज्य था। एक दिन उसे देश घूमने का विचार आया और उसने देश भ्रमण की योजना बनाई और घूमने निकल पड़ा। जब वह यात्रा से लौट कर अपने महल आया।