Moral Story: अपनों की चोट
एक सुनार था, उसकी दुकान के पास ही एक लोहार की दुकान थी एकदम सटी हुई। सुनार जब काम करता तो उसकी दुकान से बहुत धीमी आवाज़ आती, किन्तु जब लोहार काम करता तो उसकी दुकान से कानों को फोड़ देने वाली आवाज़ आती थी।
एक सुनार था, उसकी दुकान के पास ही एक लोहार की दुकान थी एकदम सटी हुई। सुनार जब काम करता तो उसकी दुकान से बहुत धीमी आवाज़ आती, किन्तु जब लोहार काम करता तो उसकी दुकान से कानों को फोड़ देने वाली आवाज़ आती थी।
एक राजा अपने घोड़े पर सवार एक जंगल से अकेला गुज़र रहा था। जब वह डाकू भीलों की झोपड़ी के पास से निकला, तब उसने देखा कि एक भील के द्वार पर पिंजरे में बंद तोता चिल्ला रहा है... “पकड़ो!... मार डालो इसे!
एक संत भिक्षा में मिले अन्न से अपना जीवन चला रहे थे एक दिन वे गांव के बड़े सेठ के यहां भिक्षा मांगने पहुंचे सेठ ने संत को थोड़ा अनाज दिया और बोला कि गुरुजी मैं एक प्रश्न पूछना चाहता हूँ।
प्रसिद्ध दर्शनशास्त्री कन्फ्यूशियस जंगल में बैठे थे। अचानक ही सम्राट उधर से गुज़रा। उन्हें एकांत में बैठे देख सम्राट ने पूछा तुम कौन हो? कन्फ्यूशियस ने कहा ‘मैं सम्राट हूँ।’
मैं ऐसे बहुत से लोगों को जानता हूँ, जो किसी ऐसी चीज़ को नहीं अपनाते जो उन्हें खुशी दे सकती है, केवल इसलिए क्योंकि वे समझते हैं कि उनके पास समय नहीं है। वह कार्य उनकी सूची में नहीं होता।
विश्वामित्र ने ऋषि, महर्षि और उसके बाद राज ऋषि तक की उपाधि पा ली थी, मगर कोई उन्हें महाऋषि का दर्जा नहीं दे रहा था। जब भी कहीं ऐसी कोई चर्चा चलती, उन्हें यही सुनने को मिलता कि महाऋषि तो वशिष्ठ हैं।
संत दादू दयाल अपनी सादगी और सहनशीलता के लिए सर्वत्र विख्यात थे। एक बार एक थानेदार घोड़े पर सवार होकर उनके दर्शन को चल पड़ा। संत दादू फटे-पुराने वस्त्र पहने एक पेड़ की छाया में बैठे कुछ काम कर रहे थे।