Moral Story: क्रोध
एक संत भिक्षा में मिले अन्न से अपना जीवन चला रहे थे एक दिन वे गांव के बड़े सेठ के यहां भिक्षा मांगने पहुंचे सेठ ने संत को थोड़ा अनाज दिया और बोला कि गुरुजी मैं एक प्रश्न पूछना चाहता हूँ।
एक संत भिक्षा में मिले अन्न से अपना जीवन चला रहे थे एक दिन वे गांव के बड़े सेठ के यहां भिक्षा मांगने पहुंचे सेठ ने संत को थोड़ा अनाज दिया और बोला कि गुरुजी मैं एक प्रश्न पूछना चाहता हूँ।
एक बार स्वामी विवेकानंद के आश्रम में एक व्यक्ति आया और उनसे बोला “मैं अपने जीवन से बहुद दुखी हूँ, मैं अपने दैनिक जीवन में बहुत मेहनत करता हूँ, काफी लगन से भी काम करता हूँ लेकिन कभी भी सफल नहीं हो पाया”।
प्रसिद्ध दर्शनशास्त्री कन्फ्यूशियस जंगल में बैठे थे। अचानक ही सम्राट उधर से गुज़रा। उन्हें एकांत में बैठे देख सम्राट ने पूछा तुम कौन हो? कन्फ्यूशियस ने कहा ‘मैं सम्राट हूँ।’
मैं ऐसे बहुत से लोगों को जानता हूँ, जो किसी ऐसी चीज़ को नहीं अपनाते जो उन्हें खुशी दे सकती है, केवल इसलिए क्योंकि वे समझते हैं कि उनके पास समय नहीं है। वह कार्य उनकी सूची में नहीं होता।
एक व्यक्ति ने अखबार में स्पोर्ट्स कार के सम्बन्ध में विज्ञापन पढ़ा। यह कार केवल 3 हज़ार मील ही चली थी। विज्ञापन में शेखी बघारी गई थीः ‘‘बिल्कुल नई जैसी, जैसे अभी-अभी तैयार होकर आई हो। कीमत 750 डालर।’’
मैं आपको यह बताना चाहता हूँ कि कुछ विशेष मुद्दों के बारें में लिखना तो बहुत आसान होता है लेकिन व्यवहार मे उन्हीं बातों का अनुसरण करना प्रचार करने की तुलना में कहीं अधिक कठिन होता है।
विश्वामित्र ने ऋषि, महर्षि और उसके बाद राज ऋषि तक की उपाधि पा ली थी, मगर कोई उन्हें महाऋषि का दर्जा नहीं दे रहा था। जब भी कहीं ऐसी कोई चर्चा चलती, उन्हें यही सुनने को मिलता कि महाऋषि तो वशिष्ठ हैं।