Fun Story: वान और मेंग
बहुत पहले की बात है। उन दिनों चीन की दीवार का निर्माण जोरों पर था। पुसान वंश का सम्राट शिह हुआंग बहुत दुष्ट था। दीवार के निर्माण के लिए उसने जबरन गांवों से अनेक किसानों को बुलवा लिया था।
बहुत पहले की बात है। उन दिनों चीन की दीवार का निर्माण जोरों पर था। पुसान वंश का सम्राट शिह हुआंग बहुत दुष्ट था। दीवार के निर्माण के लिए उसने जबरन गांवों से अनेक किसानों को बुलवा लिया था।
एक बकरी थी और एक उसका मेमना। दोनों जंगल में चर रहे थे। चरते-चरते बकरी को प्यास लगी। मेमने को भी प्यास लगी। बकरी बोली- “चलो, पानी पी आएँ।” मेमने ने भी जोड़ी, “हाँ माँ! चलो पानी पी आएँ।”
बहुत पुरानी बात है। हमारे गांव में एक सज्जन रहते थे, नाम था उनका मुंशी सजधज लाल, जैसा नाम था, वैसा ही काम भी था, मुंशी जी घर से बाहर जब भी निकलते, तब रेशमी कुर्ता, साफ सुथरी धोती पहनते।
एक कौवा एक वन में रहा करता था, उसे कोई कष्ट नहीं था और वह अपने जीवन से पूरी तरह संतुष्ट था। आजादी से जब चाहे, जहां चाहे, उड़ता फिरता था। एक दिन उड़ते हुए वह एक सरोवर के किनारे पहुँचा।
उन दिनों बनारस नगरी में शीतल नाम के एक ज्ञानी जी रहते थे, वे शांत प्रकृति एवं नेक दिल इंसान थे। उनकी धैर्य शीलता और दयालुता के कारण कई लोग उन्हें त्याग एवं तपस्या का साक्षात देवता कहकर पुकारते थे।
एक नौजवान चीता पहली बार शिकार करने निकला। अभी वो कुछ ही आगे बढ़ा था कि एक लकड़बग्घा उसे रोकते हुए बोला, “अरे छोटू, कहाँ जा रहे हो तुम?” “मैं तो आज पहली बार खुद से शिकार करने निकला हूँ!”
नया वर्ष आने में कुछ घंटे शेष थे। टी.वी. पर विभिन्न कार्यक्रम देख चुकने पर पिंकी पलंग पर जा लेटी पर आज रात उसे नींद नहीं आ रही थी। परिवार के और सदस्य धीरे-धीरे सोने लगे थे। बाहर पटाखों का धूम-धड़ाका अभी-अभी शांत हुआ था।