Motivational Story: भगवान की गोद
कुछ माह पूर्व मेरे एक मित्र ने शिकायत की, कि उसके पास प्रार्थना के लिए कोई समय ही नहीं बचता क्योंकि 3 घंटे तो उसके कार्यस्थल तक आने और जाने में ही बर्बाद हो जाते हैं और शेष समय उसका काम करते हुए गुजर जाता है।
कुछ माह पूर्व मेरे एक मित्र ने शिकायत की, कि उसके पास प्रार्थना के लिए कोई समय ही नहीं बचता क्योंकि 3 घंटे तो उसके कार्यस्थल तक आने और जाने में ही बर्बाद हो जाते हैं और शेष समय उसका काम करते हुए गुजर जाता है।
एक नर्स ने एक भाषण के दौरान बताया कि उसमें विकास कैसे हुआ ‘‘कुछ वर्षों तक मैं एक रजिस्टर्ड नर्स थी। मैं खुद को हमेशा ही एक दयावान इंसान समझती थी, एक ऐसा इंसान समझती थी, जो किसी की पीड़ा या संवेदना की थाह पा सकता है।
मैं ऐसे बहुत से लोगों को जानता हूँ, जो किसी ऐसी चीज़ को नहीं अपनाते जो उन्हें खुशी दे सकती है, केवल इसलिए क्योंकि वे समझते हैं कि उनके पास समय नहीं है। वह कार्य उनकी सूची में नहीं होता।
एक दिन मैं रेल में सफर कर रहा था जब किशोरों का एक समूह गाड़ी में सवार हो गया। जल्दी ही पूरा डिब्बा हंसी और खुशी की किलकारियों से भर गया और मैं भी इसका आंनद लेने लगा जब अचानक ही मौत जैसी चुप्पी पसर गई।
फटे-पुराने कपड़े पहने एक महिला पंसारी की दुकान में गई और बहुत विनम्रतापूर्वक ढंग से बताया कि उसका पति बीमार है और वह कोई काम-धंधा करने में असमर्थ है। उसके 7 बच्चे हैं, जिनका भरण-पोषण करने के लिए मुझे उधार समान की जरूरत है।
नट्टू बड़ा आलसी लड़का था। वह सुबह देर से उठा करता था। पढ़ाई में उसका मन बिल्कुल नहीं लगता था। कहने को तो वह रात के ग्यारह बजे तक पढ़ता था। लेकिन आँखों में नींद भरी होने के कारण उसकी समझ में कुछ नहीं आता था।
एक व्यक्ति ने अखबार में स्पोर्ट्स कार के सम्बन्ध में विज्ञापन पढ़ा। यह कार केवल 3 हज़ार मील ही चली थी। विज्ञापन में शेखी बघारी गई थीः ‘‘बिल्कुल नई जैसी, जैसे अभी-अभी तैयार होकर आई हो। कीमत 750 डालर।’’