भोली चुहिया और चालाक बिल्ली
भोली चुहिया कमरे के एक कोने में अपने चार बच्चों के साथ बैठी थी। बच्चे अभी केवल एक दिन के ही थे इसलिए मम्मी चुहिया उन पर बहुत ध्यान दे रही थी।
भोली चुहिया कमरे के एक कोने में अपने चार बच्चों के साथ बैठी थी। बच्चे अभी केवल एक दिन के ही थे इसलिए मम्मी चुहिया उन पर बहुत ध्यान दे रही थी।
कहानी बंगाल के वीरभूमि जिले की है, जहाँ 5,000 साल पहले एक पहाड़ी इलाके में रामदेव नाम का एक युवक रहता था। गाँव उपजाऊ नहीं था, इसलिए जीवन यापन करना कठिन था।
एक हरे-भरे जंगल में एक सुंदर मोर रहता था। उसकी चमकीली, रंग-बिरंगी पंखों वाली पूंछ देखकर सभी जानवर उसकी प्रशंसा करते थे। वह हर सुबह नदी किनारे जाकर अपने पंख फैलाकर नाचता और अपने ही रूप में मगन हो जाता।
एक बार की बात है, एक बड़ा हाथी और एक छोटा मच्छर था। हाथी बहुत बड़ा और मजबूत था, जबकि मच्छर बहुत छोटा और हल्का था। भले ही वे आकार में अलग-अलग थे, लेकिन उन दोनों में अपने-अपने खास गुण थे
बहुत समय पहले की बात है, एक हरा-भरा जंगल था जिसमें सभी जानवर खुशी-खुशी रहते थे। इस जंगल में एक युवा हाथी, मोती, रहता था। मोती बहुत मजबूत और बुद्धिमान था
"गहरे जंगल का जादू: एक नई दोस्ती की कहानी" में जानिए कैसे चार दोस्तों ने मिलकर अपने जंगल को खतरों से बचाया और सच्ची दोस्ती की महत्ता को समझा। यह कहानी बच्चों को मनोरंजन के साथ-साथ महत्वपूर्ण पाठ भी सिखाएगी
एक जंगल में एक कछुआ और लोमड़ी रहते थे। दोनों बहुत अच्छे दोस्त थे, लेकिन उनकी खूबियों और कमजोरियों में बड़ा अंतर था। कछुआ बहुत धीमी चाल से चलता था, जबकि लोमड़ी तेज और चालाक थी। फिर भी, दोनों हमेशा साथ रहते थे और एक-दूसरे की मदद करते थे।