बच्चों की मजेदार हिंदी कहानी: चोरी की खीर
श्रीपुर नामक कस्बे में भोला नाम का एक युवक रहता था। बचपन से ही वह कामचोर एवं काहिल स्वभाव का था। घर परिवार के दैनिक कार्यों से उसका कोई वास्ता न होता था।
श्रीपुर नामक कस्बे में भोला नाम का एक युवक रहता था। बचपन से ही वह कामचोर एवं काहिल स्वभाव का था। घर परिवार के दैनिक कार्यों से उसका कोई वास्ता न होता था।
किसी नगर में एक सेठ रहता था जिसने अपनी मेहनत से खूब धन कमाया और शहर में ही अपने नाम की पांच दुकानें खोलीं, सेठ को इस बात का बहुत घमंड था वह रोज अपने सेठानी से आकर कहता था।
हल्की बूंदा-बांदी हो रही थी। काली घटाएं पूरी तरह छा गई थीं। मेढ़क आनंद से उछल-कूद रहे थे। प्रयोगशाला में जीवविज्ञान के विद्यार्थियों को मेढ़क के बाहय एवं आंतरिक भाग की ठोस जानकारी देने के लिए अध्यापक ने एक मेढ़क मंगवाया।
एक राजा था, राजा का नाम था वीरभद्र। राजा वीरभद्र के चार पुत्र थे। चारों राजकुमार बहुत होनहार थे। समय बीतने के साथ-साथ राजा भी वृद्ध हो चला। एक दिन वह मंत्री को बुला कर बोला "महामंत्री, मैं तो अब बूढ़ा हो चला हूं।
किसी गांव में एक जमींदार रहता था। वह बड़ा अमीर परन्तु बड़ा घमंडी था। किसी किसान से मिलने या बात करने में उसकी इज्जत घटती थी। एक बार कुछ किसान मिलकर बात कर रहे थे।
राहुल हेलीकॉप्टर में बैठा था। उसका हेलीकॉप्टर नीले-नीले सागर के ऊपर उड़ रहा था। साथ बैठा गाइड उसे बता रहा था, "यह बाल्टिक सागर है। दूसरी ओर नार्थसागर है। ये दोनों ओर से स्वीडन को घेरे हुए हैं"।
मुल्ला नसीरूद्दीन ने एक आदमी से कुछ उधार लिया था। मुल्ला नसीरूद्दीन समय पर उधार चुका नहीं पाया और उस आदमी ने इसकी शिकायत बादशाह से कर दी। बादशाह ने मुल्ला को दरबार में बुलाया।