Fun Story : मंझले नवाब की मज़ेदार कहानी
Fun Stories - बग्गन मियां कहने को तो खुद को नवाबी खानदान का बताते थे, पर वास्तव में हालत ऐसी न थी। घर में चाहे पतली, मूंग की दाल पी हो, पर बाहर निकल कर ऐसी डकार मारते जैसे पूरा बकरा डकार कर आ रहे हों।
Fun Stories - बग्गन मियां कहने को तो खुद को नवाबी खानदान का बताते थे, पर वास्तव में हालत ऐसी न थी। घर में चाहे पतली, मूंग की दाल पी हो, पर बाहर निकल कर ऐसी डकार मारते जैसे पूरा बकरा डकार कर आ रहे हों।
भईया लाल एक डरपोक किस्म के व्यक्ति थे। भूत-प्रेत, जादू-टोना, बस इन्ही को लेकर वह अक्सर परेशान रहते थे। क्योंकि बचपन से ही वह एक ऐसे माहौल में रहे थे जहां पर हमेशा ऐसी अन्धविश्वासी बातों का जिक्र चल जाया करता था।
प्रीतमपुर में एक जाट रहता था। साधारण नहीं बल्कि जिसके बारे में कहा जाता था, "दूसरों को मूर्ख बनाओ, और मौज उड़ाओ"। उस जाट को सब गंगू कह कर पुकारते थे। एक बार गंगू को एक बैल की आवश्यकता पड़ गई।
श्रीपुर नामक कस्बे में भोला नाम का एक युवक रहता था। बचपन से ही वह कामचोर एवं काहिल स्वभाव का था। घर परिवार के दैनिक कार्यों से उसका कोई वास्ता न होता था।
किसी नगर में एक सेठ रहता था जिसने अपनी मेहनत से खूब धन कमाया और शहर में ही अपने नाम की पांच दुकानें खोलीं, सेठ को इस बात का बहुत घमंड था वह रोज अपने सेठानी से आकर कहता था।
हल्की बूंदा-बांदी हो रही थी। काली घटाएं पूरी तरह छा गई थीं। मेढ़क आनंद से उछल-कूद रहे थे। प्रयोगशाला में जीवविज्ञान के विद्यार्थियों को मेढ़क के बाहय एवं आंतरिक भाग की ठोस जानकारी देने के लिए अध्यापक ने एक मेढ़क मंगवाया।
बहुत पुरानी बात है, पर है सच्ची। एक बार एक खूंखार डाकू सिकन्दर बादशाह के सम्मुख लाया गया। सिपाहियों ने बड़े प्रयास के पश्चात उसे गिरफ्तार किया था। वह अपना सिर झुकाये खड़ा था। उसके हाथ-पैर रस्सियों से बुरी तरह बंधे थे।