Moral Story: घमंडी राजकुमारी
एक था राजा, उसकी एक बेटी थी। वह बहुत सुंदर और चतुर लेकिन घमंडी थी। कोई भी उसे नाम लेकर नहीं बुलाता था।उसकी सहेलियां भी उसे हर समय राजकुमारी जी कहकर पुकारती थीं। बहुत से लोगों को तो उसका नाम भी पता नहीं था।
एक था राजा, उसकी एक बेटी थी। वह बहुत सुंदर और चतुर लेकिन घमंडी थी। कोई भी उसे नाम लेकर नहीं बुलाता था।उसकी सहेलियां भी उसे हर समय राजकुमारी जी कहकर पुकारती थीं। बहुत से लोगों को तो उसका नाम भी पता नहीं था।
मेरा एक दोस्त मॉन्टी रॉबर्ट्स, जो सैन सिडरो में अपना एक पशु फार्म चलाता है। उसने अपना घर मुझे इस्तेमाल करने के लिए दिया, ताकि मैं वहां युवाओं के लिए कुछ इवेंट्स करवाकर पैसे कमा सकूं।
एक राजा था। वह बड़ा सनकी था। उसे यदि किसी व्यक्ति पर गुस्सा आता, तो उसे रातभर बर्फ जैसे ठंडे पानी में खड़े होने की सजा दे देता। एक दिन उसे किसी बात पर अपने महामंत्री पर गुस्सा आ गया।
एक वन में हाथियों का एक झुंड रहता था। झुंड के सरदार को गजराज कहते थे। वो विशालकाय, लम्बी सूंड तथा लम्बे मोटे दांतों वाला था। खंभे के समान उसके मोटे मोटे पैर थे। जब वो चिंघाड़ता था तो सारा वन गूंज उठता था।
सूर्य अस्त हो चला था। आकाश में बादल छाए हुए थे। नीम के एक पेड़ पर ढेर सारे कौवे रात बिताने के लिए बैठे हुए थे। कौवे अपनी आदत के अनुसार, आपस में एक-दूसरे से काँव-काँव करते हुए झगड़ रहे थे।
राम, कृष्ण और मोहन तीन भाई थे, वह सभी बहुत गरीब थे, वह एक फैक्ट्री में काम करते थे। एक दिन वह अपने गांव के मंदिर में गए उन्होंने भगवान से प्रार्थना की, कि भगवान उन्हें अमीर बना दे। अचानक उनसे भगवान बात करने लगे।
यह बदले की भावना भी बड़ी विचित्र है। इन्सान तो क्या जानवर भी इससे अछूते नहीं रह पाते। एक समय की बात है एक घने जंगल में एक गीदड़ और लोमड़ी रहा करते थे। यूं कहने को तो वे मित्र थे।