Moral Story: किसी का दोष न देखो
भगवान बुद्ध के एक शिष्य ने एक दिन भगवान तथागत् के चरणों में प्रणाम किया और वह हाथ जोड़कर खड़ा हो गया। भगवान ने उससे पूछा- “तुम क्या चाहते हो?” शिष्य बोला- ''भगवन्! यदि आज्ञा दें, तो मैं देशाटन करना चाहता हूँ।''
भगवान बुद्ध के एक शिष्य ने एक दिन भगवान तथागत् के चरणों में प्रणाम किया और वह हाथ जोड़कर खड़ा हो गया। भगवान ने उससे पूछा- “तुम क्या चाहते हो?” शिष्य बोला- ''भगवन्! यदि आज्ञा दें, तो मैं देशाटन करना चाहता हूँ।''
नया वर्ष आने में कुछ घंटे शेष थे। टी.वी. पर विभिन्न कार्यक्रम देख चुकने पर पिंकी पलंग पर जा लेटी पर आज रात उसे नींद नहीं आ रही थी। परिवार के और सदस्य धीरे-धीरे सोने लगे थे। बाहर पटाखों का धूम-धड़ाका अभी-अभी शांत हुआ था।
बहुत समय पहले की बात है। बगदाद में एक चरवाहा रहता था। उसका नाम अबू था। उसके पास कई भेड़ बकरियां थीं, जिन्हें वह रोज़ाना पास की पहाड़ियों पर चराने ले जाता था। वैसे तो अबू एक अच्छा इंसान था।
धीरू बेटे, शाम के सात बजने वाले हैं। अंधेरा गहनता की ओर खिसक रहा है। आज मुझे कुछ जरूरी काम से जाना है। हमें घर पहुंचने में देर हो सकती है। रात के नौ-दस बज सकते हैं। सुबह से अब तक की बिक्री लगभग दस हजार की रही है।
एक बार एक औरत की आंखों की रोशनी चली जाती है और वह अंधी हो जाती है। वह एक डॉक्टर को बुलाती है और उससे कहती है कि अगर वह उसे ठीक कर देगा तो वह उसे बहुत बड़ी फीस देगी।
एक समय की बात है एक राजा था। उसकी एक बेटी थी जिसका नाम था मीरा। मीरा की छोटी उम्र में ही उसकी माँ की मौत हो गई थी। जिसके कारण उसके पिता को ही उसका पालन-पोषण करना पड़ा।
आठवीं कक्षा के छात्रों की बैठक जमी हुई थी कक्षा के मॉनीटर नरेन्द्र सहित अरविंद, बंटू सभी इस बात का फैसला नहीं कर पा रहे थे कि अपने प्रिय अध्यापक पंडित रामदीन शास्त्री जी को उनके रिटायरमेंट ग्रहण के अवसर पर।