Motivational Story: सेठ जी की परीक्षा
बनारस में एक बड़े धनवान सेठ रहते थे। वह विष्णु भगवान के परम भक्त थे और हमेशा सच बोला करते थे। एक बार जब भगवान सेठ जी की प्रशंसा कर रहे थे तभी माँ लक्ष्मी ने कहा, ”स्वामी, आप इस सेठ की इतनी प्रशंसा किया करते हैं।
बनारस में एक बड़े धनवान सेठ रहते थे। वह विष्णु भगवान के परम भक्त थे और हमेशा सच बोला करते थे। एक बार जब भगवान सेठ जी की प्रशंसा कर रहे थे तभी माँ लक्ष्मी ने कहा, ”स्वामी, आप इस सेठ की इतनी प्रशंसा किया करते हैं।
किसी गांव में राम नाम का एक नवयुवक रहता था। वह बहुत मेहनती था, पर हमेशा अपने मन में एक शंका लिए रहता कि वो अपने कार्यक्षेत्र में सफल होगा या नहीं। कभी-कभी वो इसी शंका के कारण आवेश में आ जाता।
बहादुर सिंह गाँव के संपन्न किसानों में से एक थे। भरा पूरा घर था, किसी चीज़ की कमी ना थी। कमी थी तो बस एक चीज की, भगवान ने जितना दिया उससे कभी खुश नहीं रहते थे। बहादुर सिंह को हमेशा भगवान से यही शिकायत रहती थी।
दागिस्तान एक खुश्क मरूस्थल है, जहां चारों ओर रेत और पत्थरों के सिवाय कुछ भी नजर नहीं आता। वहां एक खुश्क मैदान के बीच एक छोटा सा पत्थर खड़ा है। जो एक बच्चे के समान प्रतीत होता है।
किसी गाँव में एक धनी सेठ रहता था उसके बंगले के पास एक जूते सिलने वाले गरीब मोची की छोटी सी दुकान थी। उस मोची की एक खास आदत थी कि वो जब भी जूते सिलता तो भगवान के भजन गुनगुनाता रहता था।
एकबार एक आदमी रेगिस्तान में कहीं भटक गया। उसके पास खाने-पीने की जो थोड़ी-बहुत चीजें थीं वो जल्द ही खत्म हो गयीं और पिछले दो दिनों से वो पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रहा था। वह मन ही मन जान चुका था।
गाँव के स्कूल में पढ़ने वाली छुटकी आज बहुत खुश थी, उसका दाखिला शहर के एक अच्छे स्कूल के क्लास 6 में हो गया था। आज स्कूल का पहला दिन था और वो समय से पहले ही तैयार होकर बस का इंतज़ार कर रही थी।