Fun Story: कंजूस गिरधारी लाल
गिरधारी लाल, अमीर होने के बावजूद अपने मुहल्ले के सबसे कंजूस व्यक्ति थे। उनकी कंजूसी की चर्चा दूर-दूर तक फैली हुई थी। कंजूस तो वे इतने थे कि कंजूस की उपाधि भी उनके सामने फीकी पड़ती थी।
गिरधारी लाल, अमीर होने के बावजूद अपने मुहल्ले के सबसे कंजूस व्यक्ति थे। उनकी कंजूसी की चर्चा दूर-दूर तक फैली हुई थी। कंजूस तो वे इतने थे कि कंजूस की उपाधि भी उनके सामने फीकी पड़ती थी।
स्वर्ण नगरी के राजा नरपत सिंह बहुत ही सहनशील और न्यायप्रिय थे। वे सदा अपनी जनता के विषय में ही सोचते रहते थे। उन्होनें अपने राज्य में बहुत सी सुख-सुविधाएं भी लोगों को दे रखी थी।
बहुत पहले की बात है। उन दिनों चीन की दीवार का निर्माण जोरों पर था। पुसान वंश का सम्राट शिह हुआंग बहुत दुष्ट था। दीवार के निर्माण के लिए उसने जबरन गांवों से अनेक किसानों को बुलवा लिया था।
नन्हा नन्दू एक अच्छा चित्रकार था। अभी उसे न पढ़ना आता था, न लिखना, पर उसने चित्र बनाना सीख लिया था। जब भी मम्मी या पापा बाजार जाते नन्दू अपनी फरमाइशों की एक लम्बी लिस्ट उन्हें पकड़ा देता।
एक बकरी थी और एक उसका मेमना। दोनों जंगल में चर रहे थे। चरते-चरते बकरी को प्यास लगी। मेमने को भी प्यास लगी। बकरी बोली- “चलो, पानी पी आएँ।” मेमने ने भी जोड़ी, “हाँ माँ! चलो पानी पी आएँ।”
बहुत पुरानी बात है। हमारे गांव में एक सज्जन रहते थे, नाम था उनका मुंशी सजधज लाल, जैसा नाम था, वैसा ही काम भी था, मुंशी जी घर से बाहर जब भी निकलते, तब रेशमी कुर्ता, साफ सुथरी धोती पहनते।
एक कौवा एक वन में रहा करता था, उसे कोई कष्ट नहीं था और वह अपने जीवन से पूरी तरह संतुष्ट था। आजादी से जब चाहे, जहां चाहे, उड़ता फिरता था। एक दिन उड़ते हुए वह एक सरोवर के किनारे पहुँचा।