माँ की दुनिया हिंदी बाल कविता
यह कविता माँ के निःस्वार्थ प्रेम, त्याग और बच्चों के प्रति उनकी अनमोल भावनाओं का वर्णन करती है। माँ अपनी सारी खुशियाँ और सुख अपने बच्चों के लिए न्योछावर कर देती हैं।
यह कविता माँ के निःस्वार्थ प्रेम, त्याग और बच्चों के प्रति उनकी अनमोल भावनाओं का वर्णन करती है। माँ अपनी सारी खुशियाँ और सुख अपने बच्चों के लिए न्योछावर कर देती हैं।
इस कविता में एक वृक्ष की भावुक पुकार को दर्शाया गया है। वृक्ष हमसे विनती करता है कि उसे न काटें, क्योंकि वह न केवल पक्षियों के लिए घर और भोजन का स्रोत है, बल्कि हमें शुद्ध हवा, छाया और प्रदूषण से राहत भी देता है।
यह कविता चिड़िया माँ के बच्चों के प्रति अपार प्रेम और चिंता को दर्शाती है। चिड़िया माँ बच्चों के खाने-पीने का ध्यान रखते हुए बाहर जाती है, लेकिन अचानक बारिश शुरू हो जाती है।
यह कविता माँ और बच्चे के रिश्ते की मधुरता और गहराई को व्यक्त करती है। यह छोटे बच्चे की मासूम भावनाओं को दर्शाती है, जो अपनी माँ के बिना अपने जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकता।
कविता "रसोईघर की बातें" एक मजेदार और जीवंत चित्रण है जो रसोईघर में इस्तेमाल होने वाले सामानों को मानवीय रूप देती है। इसमें चकला, बेलन, चाकू, छलनी, और थाली जैसे पात्रों के माध्यम से उनके रोजमर्रा के कामों का वर्णन किया गया है।
"देखो देखो डाकिया आया" एक सरल और प्यारी कविता है जो बच्चों के लिए डाकिए की भूमिका और उसके महत्व को दर्शाती है। कविता में एक डाकिए का वर्णन किया गया है, जो खाकी कपड़े पहने, एक थैला लिए, चिट्ठियां बांटता हुआ नजर आता है।
यह कविता एक मासूम और चंचल बच्ची की कहानी है, जो अपनी टोकरियां भरकर बाजार में आम बेचने जाती है। वह नटखट अंदाज में आम दिखाती है, लेकिन उनके दाम नहीं बताती।