Moral Story: भेड़िया आया भेड़िया आया
एक बार की बात है, एक चरवाहा भेड़ों के झुंड की देख रेख करता था। एक दिन वह उदास महसूस कर रहा था और उसने गांव के लोगों को पागल बनाने के बारे में एक प्लान बनाया।
एक बार की बात है, एक चरवाहा भेड़ों के झुंड की देख रेख करता था। एक दिन वह उदास महसूस कर रहा था और उसने गांव के लोगों को पागल बनाने के बारे में एक प्लान बनाया।
एक समय की बात है, एक स्वार्थी आदमी था, उसे हर चीज़ खुद के लिए रखना पसंद था। वह अपनी चीज़ें किसी के साथ नहीं बांटता था, यहां तक कि वह अपनी चीज़ें अपने दोस्तों और गरीबों को भी नहीं देता था।
एक दिन एक आदमी अपने गधे पर दो गेहूं की बोरी रखकर बाज़ार की तरफ जा रहा था। थोड़े समय बाद वह थक गया था और आराम करने के लिए वह पेड़ के नीचे बैठ गया। जब वह सोकर उठा तो उसे अपना गधा नहीं दिखा और उसने इधर उधर अपने गधे को ढूंढना शुरू किया।
एक दिन एक लड़का समुद्र के किनारे बैठा हुआ था तभी उसे दूर कहीं एक जहाज़ लंगर डाले खड़ा दिखाई दिया। वह उसी पल जहाज तक तैर कर जाने के लिए मचल उठा।
सिम्मी की माँ पिछले एक हफ्ते से सिम्मी को लेकर काफी चिंतित थी क्योंकि उनका पालतू पशु टॉमी एक हफ्ते पहले खो गया था और उनकी बेटी सिम्मी उस सदमे से अभी तक उभरी नहीं थी।
एक नगर का राजा, जिसे ईश्वर ने सब कुछ दिया, पर फिर भी दुःखी रहता था। एक बार वो घुमते घुमते एक छोटे से गाँव में पहुँचा जहाँ उसे एक मिट्टी के बर्तन बनाने वाला व्यक्ति दिखाई दिया।
एक समय की बात है, एक राजा था जो बीमार था। उसके राज्य के सभी डॉक्टरों और बाहर के राज्य के डॉक्टरों के पास उनकी बीमारी का कोई ईलाज नहीं था। डॉक्टर उन्हें ठीक नहीं कर पा रहे थे।