Moral Story: सोनिया का संकोच
एक लड़की थी, जिसका नाम था सोनिया। वह बहुत कम बोलती थी, लड़ाई-झगड़ा तो दूर की बात थी। वह अपनी कक्षा में अध्यापक से भी कोई प्रश्न नहीं करती थी। इसीलिए सभी उसे संकोची लड़की के नाम से जानते थे।
एक लड़की थी, जिसका नाम था सोनिया। वह बहुत कम बोलती थी, लड़ाई-झगड़ा तो दूर की बात थी। वह अपनी कक्षा में अध्यापक से भी कोई प्रश्न नहीं करती थी। इसीलिए सभी उसे संकोची लड़की के नाम से जानते थे।
कमल ने अपनी गुल्लक ज़मीन पर उड़ेल दी। बहुत सारे सिक्के ज़मीन पर बिखर गये। कमल ने उन्हें गिनना शुरू कर दिया। उसका उस समय आश्चर्य का कोई ठिकाना नहीं रहा जब उसने देखा कि वे सिक्के कुल मिलाकर 1000 रुपये के लगभग थे।
राम, कृष्ण और मोहन तीन भाई थे, वह सभी बहुत गरीब थे, वह एक फैक्ट्री में काम करते थे। एक दिन वह अपने गांव के मंदिर में गए उन्होंने भगवान से प्रार्थना की, कि भगवान उन्हें अमीर बना दे। अचानक उनसे भगवान बात करने लगे।
विजय और अजय दोनों भाई कक्षा सात में पढ़ते थे। दोनों साथ साथ घर से स्कूल और स्कूल से घर आते जाते थे। विजय पढ़ने में बहुत तेज था हमेशा अपनी कक्षा में प्रथम आता था। विजय कमजोर छात्रों की सहायता करता था।
दंदकारन्य नाम के एक जंगल में एक बकरी और उसके सात मेमने रहते थे। सातों मेमने बहुत छोटे थे इसलिए वह खाने की तलाश नहीं कर सकते थे। इसलिए हर रोज़ बकरी खाने की तलाश के लिए जाती थी। वह खाना लाकर अपने मेमनों को खिलाती थी।
एक शहर में एक दर्जी की दुकान थी। यह शहर घने जंगल के काफी करीब था। जानवर और गाँव के लोग एक साथ मिल-जुलकर रहते थे, एक हाथी हर रोज़ दर्जी की दुकान के पास से गुजरता था और दर्जी दया दिखाते हुए हर रोज़ हाथी को चावल का एक गोला खिलाता था।
एक महिला अपने घर से बाहर आई और उसने तीन बुजुर्गों को देखा। उनकी सफेद लंबी दाढ़ी थी और वह आंगन में बैठे थे। वह उनको पहचान नहीं सकी। महिला ने कहा, ‘मुझे नहीं लगता कि मैं आपको जानती हूं। लेकिन ऐसा लग रहा है कि आप भूखे हैं।