Category "All Stuff"

27Sep2022

भारत में नवरात्रि का पर्व पूरे दस दिनों तक मनाया जाता है और उन दस दिनों में नारी शक्ति की नौ रूपों में पूजा की जाती है। नवरात्रि हिन्दू धर्म में  देवी शक्तिरूपा माँ दुर्गा की उपासना का पर्व है, जिसे लगभग पूरे भारत में मनाया जाता है। भारत के कई प्रदेशों में देवी दुर्गा को मुख्य देवी के रूप में माना जाता है इसलिए भारत की स्त्रियों को भी देवी का स्थान दिया जाता है और उन्हें देवी संबोधित भी किया जाता है। हालांकि यह बात मशहूर हैं कि सिर्फ भारत में ही देवी की पूजा की जाती है लेकिन यह पूरी तरह सत्य नहीं है दुनिया के कई देशों में देवी की पूजा अपने अपने संस्कृति के अनुसार होती है।

26Sep2022

ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय (Queen Elizabeth II) के ना रहने पर, उनका पुत्र प्रिंस चार्ल्स ब्रिटेन के राजा और उनकी पत्नी कैमिला महारानी बन गई। अब महारानी एलिजाबेथ द्वितीय का सुप्रसिध्द राज मुकुट, रानी कैमिला पार्कर का हो गया है । यह मुकुट पिछले सत्तर सालों से महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के सर पर जगमगाता रहा था।

24Sep2022

आज के समय में मोबाइल फोन हर इंसान की जरूरत बन गई है। अमीर हो या गरीब, लगभग सबके पास छोटा बड़ा, सस्ता या महँगा स्मार्टफोन होता ही है। यहाँ तक कि आज के बच्चे भी इसका इस्तेमाल धड़ल्ले से करते हैं। लेकिन जहां स्मार्टफोन के ढेर सारे फायदे है, वहीं इसका हमारे तन और मन पर भी बहुत दुष्परिणाम  होते है।

फायदे की बात करें तो हम इसे अपने साथ हर जगह ले जा सकते हैं तथा विश्व के लगभग किसी भी कोने से अपने प्रिय जनों से बात कर सकते हैं, मुसीबत पड़ने पर किसी भी जगह से पुलिस या मददगार को  बुला सकते हैं। साथ ही इस चलते फिरते फोन में कई तरह के ऍप्स और नेट के द्वारा हम दुनिया के किसी भी कोने में रहने वाले अपने परिवार, दोस्त से जुड़े रह सकते हैं, उनसे चैटिंग और विडियो, फोटो शेयरिंग कर सकते हैं।

नेट मोबाईल से हम पैसों का आदान प्रदान, पढ़ाई लिखाई, ट्यूशन  करने के साथ साथ अपने हुनर और आइडिया से पैसे भी कमा सकते हैं। स्मार्टफोन के जरिए हम दुनिया के किसी भी विषय पर जानकारी या मेडिकल मदद पा सकते हैं और ढेर सारे मनोरंजन के माध्यमों से  जुड़कर, बिना किसी खास ख़र्चे के, सिर्फ डाटा पैक या  वाईफाई के द्वारा, भरपूर मनोरंजन भी पा सकते है। लेकिन सावधान, स्मार्टफोन के इतने सारे उपयोग होने के बावजूद यह हमारे लिए एक मुसीबत का जड़ बन सकता है और  हमारे शरीर को बीमारों का घर भी बना सकता हैं।

दरअसल मोबाइल फोन से निकलने वाले इलेक्ट्रो मैग्नेटिक विकिरणों से हमारे डीएनए को नुकसान होता है। साथ ही अगर हम मोबाईल फोन का ज़्यादा इस्तमाल करते हैं तो इसके रेडियेशन से हमको कई तरह की शारीरिक और मानसिक बीमारियां भी हो सकती है जैसे फोन एडिक्शन, कैंसर, ट्यूमर, हृदय रोग, कमजोर आँखे, चक्कर आना, चिड़चिड़ापन, सुस्ती, भ्रम, सादा सरदर्द, जटिल सरदर्द जैसे माइग्रेन, तेज या मन्द नब्ज़ चलना तथा नींद ना आना।

हाल के रिसर्च से यह दावा किया गया है कि ज्यादा देर तक छोटे छोटे वीडियोज भी देखते रहने से नींद ना आने और रात रात भर जागते रहने की खतरनाक बीमारी लग जाती है, क्योंकि छोटे वीडियो क्लिप्स, लगातार एक के बाद एक चलते रहते है। डॉक्टर्स के अनुसार अगर हमारी नींद पूरी नहीं होती तो हमारा इम्यून सिस्टम खराब हो  जाता है और हमें कोई भी छोटा या भयंकर रोग लग सकता है।

इसके अलावा सुस्ती, मोटापा, भूख कम या ज्यादा लगने के साथ हमेशा चिड़चिड़ानापन बना रहता है। इसलिए हमें मोबाईल फोन का इस्तमाल सम्भल कर करना चाहिए। रात को सोने से पहले तो मोबाइल फोन बिल्कुल नहीं देखना चाहिए। मोबाइल को अपने शरीर से सटाकर नहीं रखना चाहिए और अपने स्मार्टफोन को बिस्तर पर लेकर कभी नहीं सोना चाहिए।

★सुलेना मजुमदार अरोरा★

22Sep2022

आधुनिकता के साथ साथ नये नये विज्ञान और तकनीक विकसित होते जा रहे है। एक समय ऐसा था जब डबल डेकर बस और डबल डेकर ट्रेन भी एक अजूबा था और आज बात हो रही है आसमान में उड़ने वाले डबल डेकर हवाई जहाज की। जरा सोचिए कि जब आसमान में डबल डेकर बस और डबल डेकर ट्रेन की तरह डबल डेकर प्लेन की सुविधा यात्रियों को मिल जाएगी तो इंसानों का जीवन और भी कितना आसान हो जाएगा और यात्रा करना आज की तुलना में कई गुना तेज और आरामदायक हो सकता है ।

20Sep2022

अक्सर हम फैंटेसी फ़िल्मों में उड़ने वाली गाड़ियां देखते हैं, जिसे सिर्फ एक कल्पना माना जाता रहा है, लेकिन अब सचमुच उड़ने वाली बाइक बन कर तैयार हो गई है। इसे बनाया है जापान की स्टार्ट अप कम्पनी एरविंस टेक्नोलॉजी ने। हाल ही में अमेरिका के डेट्रायट ऑटो शो के मौके पर इस उड़न बाइक , जिसका नाम है Xturismo, का  फ्लाइंग डेमो , आम जनता के सामने रखा गया।

19Sep2022

अग्नि शमन यानी फायर ब्रिगेड दल के फायर फाइटर्स बनना एक बहुत बड़ी चुनौती और जिम्मेदारी होती है। पहले इस क्षेत्र में सिर्फ पुरूषों को ही फायर फाइटर्स और फायर स्टेशन ऑफिसर के रूप में नियुक्त किया जाता था। लेकिन जैसे जैसे वक्त बदलता गया और दुनिया नें स्त्रियों की योग्यता और क्षमता को मान्यता मिलने लगी, तब जाकर, दुनिया भर के कई देशों में, स्त्रियों को भी अग्नि शमन दल के प्रोफेशनल और वालंटियर, सदस्य के रूप में नियुक्त किया जाने लगा। 1818 में अग्निशमन दल यूनाइटेड स्टेटस की पहली महिला फायर फाइटर बनी मौली विलियम्स।

उसके बाद धीरे धीरे, वक्त के साथ और भी देशों के फायर ब्रिगेड दल में स्त्री फायर फाइटर्स नियुक्त होने लगे, जैसे मरीना बेट्स लिली हिचकॉक, एमा वेर्नेल, सरिन्या सृस्कूल, तुलुम्बकी बहरिये, मेरी जॉय लंगडन, ऐनी बैरी, ब्रेंडा बेर्कमन, हीथर बर्नेस, डेनिस बाचेर, डौन मेनार्ड, अल्लिसों मीनाहन, एड्रिएन्ने क्लार्क, मेलानी गोएहर, क्रिस्टिन अपील, विकी हंटर, सैली फूटे, शमीना वेल्स, मिशेल यंग, निक्की लाफ़रटी, नेला बूथ चारमैने सेल्लिंग्स, रौन्ढा थोर्पे, कैटरिना मुलेट, एलिसन टाइम्स, रोज मेरी हिग्गिंस, तंजा ग्रन्वाल्ड, शाज़िया परवीन, तथा कई और साहसी महिलाएँ अग्नि शमन दल में कार्यरत रही।

सन् 2002 में हर्षिनी कन्हेकर भारत की पहली अग्नि शमन दल की फायर फाइटर बनी। सन् 2003 में प्रिया रविचन्द्रन भारत की पहली डिवीजनल फायर ऑफिसर महिला बनी जिन्हें देश में पहली बार, उनकी बहादुरी के लिए एना मेडल प्रदान किया गया। मीनाक्षी विजयकुमार भी भारत की एक बहादुर फायर फाइटर है जिन्होंने 400 अग्नि कांड की घटनाओं को सम्भाला और उन्हें 2013 में प्रेसिडेंट्स फायर सर्विस मेडल दिया गया। हाल ही में, मुंबई फायर ब्रिगेड की दो महिला असिस्टेंट स्टेशन ऑफिसर्स को, प्रोमोशन देकर स्टेशन ऑफिसर बना दिया गया।

These brave women included in the fire brigade team

मुंबई फायर ब्रिगेड के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ। इनके नाम है शुभांगी भोर (33 वर्ष) और सुनीता खोट (35 वर्ष)। यह दोनों महिलाए, मुम्बई फायर ब्रिगेड हेड कवाटर्स से जुड़े भायखला फायर स्टेशन में बतौर असिस्टेंट स्टेशन ऑफिसर दस साल से सेकंड इंचार्ज के तौर पर काम कर रही थी। अब उन्हें स्टेशन ऑफिसर का पद मिल गया है। पहले जहां वे आठ घंटे ड्यूटी करती थी, वहीं अब उन्हें 24 घण्टे हर एक इमर्जेंसी कॉल को अटेंड करना होगा। सुनीता को 2018 में क्रिसटल टावर अग्निकांड में कई लोगों को बचाने के लिए ब्रेवरी अवार्ड भी दिया गया था ।

These brave women included in the fire brigade team

मुंबई फायर ब्रिगेड में 127 महिलाएं पर्सनल भी है। चाहे कोई बिल्डिंग ढह जाए, या कहीं आग लगे या कोई इमर्जेंसी हो, इन महिला अफसरों को तुरंत हर आपदा को सँभालना होगा। महिला अग्नि शामक दल में भर्ती होने के लिए, महिलाओं को कम से कम 162 cm लम्बा, 50 केजी वजन के होना चाहिए, उनमें चार मिनट में 800 मीटर्स दौड़ने की शक्ति होनी चाहिए, पीठ पर 45 किलो वजन उठाकर भागने और 19 फीट ऊंचाई से छलांग लगाने की योग्यता भी होनी चाहिए।

सुलेना मजुमदार अरोरा

17Sep2022

भारत के प्रधानमंत्री आदरणीय श्री नरेंद्र मोदी जी के शुभ जन्मदिवस पर उन्हें मिले साउथ अफ्रीकन चीतों के तोहफ़ो की खूब चर्चा है। नामीबिया से, 16 घन्टों की यात्रा करके भारत के कुनो पाल पुर नैशनल पार्क (केपीएनपी) पधारे इन आठ चीतों को लेकर सबकी बहुत उत्सुकता है। इसमें पाँच मादा और तीन नर चीते है जिनकी उम्र ढाई साल से बारह साल तक है। मजे की बात तो यह है कि इन नामीबियन चीतों को अफ्रीका से भारत लाने के लिए जिस विशेष चार्टर कार्गो विमान का इस्तमाल किया गया उसकी शक्ल भी चीते जैसी थी और उसपर चीते की पेंटिंग भी की गई थी।

दुनिया के किसी भी देश में चीतों को पंहुचाने का काम एयरलाइन्स कम्पनी ने पहली बार किया है जिसके कारण यह परियोजना इस विमान कम्पनी के लिए भी एतिहासिक रहा । एयर क्राफ्ट के अंदर चीतों के पिंजरे को आराम से अंदर रखा गया था और  साथ में पशु चिकित्सक की पूरी टीम भी थी।  दरअसल चीता इंट्रोडक्शन प्रोजेक्ट के तहत भारत को इस वर्ष बीस अफ्रीकन चीते मिलने थे, नामीबिया से आठ, जो भारत को मिल गए और बाकी बारह बाकी है। विश्व में पहली बार ऐसा हुआ जब कोई बड़े मांसाहारी पशु को एक द्वीप से दूसरे द्वीप रिलोकेट किया गया। प्रधानमन्त्री ने हैंडल घुमाया और पिंजरे का दरवाज़ा खुलते ही चीते कुनो नैशनल पार्क में चले गए। फ़िलहाल ये इस पार्क में कवारेंटाइन के हिसाब से रहेंगे , उसके बाद जंगल में छोड़ दिया जायेगा। अब जानिए कि भारत को अफ्रीका से चीते मंगवाने की जरूरत क्यों पड़ी? दरअसल एक ज़माने में भारत के जंगलों में चीतों की भरमार थी। लेकिन यहाँ के कई राजाओं और बाहर से आए आक्रमणकारियों द्वारा शिकार किए जाने के कारण 1947 तक लगभग सारे चीते खत्म हो गए और 1952 में चीतों को लुप्त घोषित किया गया।

जहां भारत के जंगलों में शेर, बाघ, तेंदुए, हाथी, जंगली गाय, जीराफ, भालू, जंगली भैंस, बारहसिंगा, हिरण, चीतल वगैरह जंगली पशुओं की कोई कमी नहीं लेकिन एक भी चीता नहीं बचा। वैसे पिछले साठ सालों से चीतों को दूसरे देश से भारत लाए जाने की कोशिश और अथक प्रयास होता रहा जो आखिर 17 सितंबर 2022 को रंग लाई। दो तीन महीने लगेंगे इन चीतों को, कुनो नदी किनारे बसे जंगल में सहज होकर अपना नया जीवन शुरू करने में, उसके बाद, आज की हमारी पीढ़ी देख पाएंगे कि आखिर चीते होते कैसे है और कुनो क्षेत्र के आसपास का क्षेत्र पर्यटकों के आवाजाही से विकसित होगा।

चीते और तेंदुए में फर्क

चीते और तेंदुआ लगभग एक से दिखते हैं, लेकिन उनमें कुछ बुनियादी फर्क है, जैसे तेंदुए कम से कम 100 किलो वजन के होते है और चीतों की तुलना में भारी, मांसल और मजबूत होते है। उनके सर बड़े होते है, तेंदुआ छुपकर घात लगाकर शिकार करते हैं, उनके पीले रंग के खाल में अलग अलग आकार के धब्बे होते है। वे ज्यादा ऊँचे नहीं होते। चीते ऊँचे, छरहरे और लगभग 72 किलो के आसपास होते है, उनके कंधे लंबे, चेहरा छोटा और दोनों आँखों से ठुड्डी तक काली लकीर खिंची होती है और वो 120 किलोमीटर प्रति घन्टे की रफ्तार से, हवा से ज्यादा वेग से दौड़कर शिकार करते है। उनके हल्के पीले, या क्रीम रंग के खाल में गोल और अंडाकार धब्बे होते है।

★सुलेना मजुमदार अरोरा★

14Sep2022

दुनिया में बहुत से महान, ज्ञानी और गुणी लोगों के बारे में हम इतिहास में पढ़ चुके है लेकिन कुछ ऐसे भी लोग हैं जिनके महान कर्मों की चर्चा जन जन तक नहीं पहुंच पाई है, आज हम उन्हीं महान इंसानों में से एक, गुरदेव सिंह खुश के बारे में जानकारी लेते है जिनके बारे में कहा जाता है कि उन्होंने अपने प्रयासों से दुनिया की भूख मिटाई

13Sep2022

आज दादा दादी डे है लेकिन सच पूछो तो दादा दादी और नाना नानी हमारे जीवन में एवरी डे की जरूरत है। ये सही है कि माता पिता हमें बहुत प्यार करते हैं और हमारी सारी जरुरतों को पूरा करते हुए हमें पढ़ा लिखा कर अच्छा इंसान बनाते हैं लेकिन जो लाड़, आनंद और मज़ा हमारे दादा दादी, नाना नानी हमें देतें हैं वो कोई भी नहीं दे सकते है। ठंड के मौसम में दादा दादी, नाना, नानी की गोद में दुबक कर उनके हाथों से तोड़ी मूंगफली, गजक खाने का जो मज़ा है और गर्मी की दोपहर में दादी, नानी की हाथों से बनी लस्सी, आम पना, खस और नींबू के शर्बत में जो ठंडक है वो हॉट डॉग, बर्गर या फिर आइस क्रीम पार्लर से खरीदी या ऑनलाइन मँगवाई आइस क्रीम में कहाँ?

दादा दादी और नाना नानी हमारे परिवार के सबसे बडे और महत्त्वपूर्ण सदस्य हैं। मम्मी किचन में, या ऑफिस में या घर के हजारों कामों में व्यस्त रहती हैं, पापा को ऑफिस का बहुत काम रहता है, ऐसे में दादा दादी और नाना नानी ही वो अपने है जो हमें गोद में लेकर या पास बिठाकर हमसे हमारे दिन भर की कहानियां या घटनाएं बड़े चाव से सुनते हैं।

कोई जिद हो, कोई हठ हो, कोई ईच्छा हो, हमारे माता पिता पूरा कर पाएं या नहीं कर पाएं, हमारे दादा दादी, नाना नानी, अपनी हैसियत के अनुसार पूरा करने की पूरी कोशिश करते हैं और अगर उनसे ना हो पाए तो कम से कम मम्मी पापा को समझा बुझा कर उन्हीं से हमारी इच्छायें पूरी करने में मदद करते हैं। स्कूल छोड़ने जाना हो, स्कूल से वापस लाना हो या ट्यूशन क्लास में पहुंचाना या वहां से ले आना हो, या फिर किसी भी एक्स्ट्रा  कैरिकुलर क्लास में दाखिला करवाना हो, हमारे दादा, दादी, नाना, नानी खुशी खुशी ये काम करके हमारे माता पिता को निश्चिंत कर देते हैं।

कभी टीचर ने आपके खिलाफ उनसे कोई शिकायत की हो, या किसी दोस्त के साथ आपका झगड़ा हुआ हो तो दादा, दादी नाना नानी, कुछ इस तरह से उसे निपटा देते हैं कि आपको मम्मी पापा से डांट नहीं खानी पड़ती। किसी के पास वक्त हो या ना हो, दादा दादी नाना नानी के पास पोते पोतियों, नाती नातिन के लिए भरपूर वक़्त जरूर होता है। बच्चों को कहानियां सुनाने से लेकर, उन्हें नहलाने धुलाने, सजाने संवारने और उन्हें घुमाने ले जाने की जिम्मेदारी हमारे दादा, दादी, नाना, नानी सहर्ष करते हैं और खेल खेल में हमें जीवन की जो गहरी पाठ पढ़ा देतें है, जो अच्छे संस्कार हमारे अंदर पिरो देतें हैं, उसका एहसास हमें तब होता है जब वे हमारे पास नहीं होते।

उनके द्वारा कही कहानियों में बहुत ज्ञान, सीख तथा जीवन को सफ़लता से जीने के संदेश छुपे होते हैं। दादा और नाना जहां हमें देश दुनिया की अजब गजब घटनाएं बताते हैं, अखबार पढ़ना सिखाते हैं वहीं दादी, नानी हमें घर गृहस्थी की बातों के साथ साथ हमें शालीनता और सभ्यता तथा समाज में उठने बैठने का शऊर, सिलाई कढाई, पूजा पाठ, ईश्वर की बातेँ सिखाते हैं। बच्चे कई बार अपने दिल की बातें, सिर्फ दादा दादी, नाना नानी से ही शेयर कर पातें है।

आज के आधुनिक युग में, छोटे एकल परिवार होने के कारण कई बार हमारे दादा दादी, नाना नानी से हम दूर हो जाते हैं, जो बहुत दुखद है। हम सबको चाहिए कि हम अपने घर के इन प्यारे बुजुर्गों को खूब मान, सम्मान और प्यार के साथ अपने साथ रखे और फिर देखिए कैसे आपको अपने घर में ही दुनिया भर की खुशियां मिल जाती है।

★सुलेना मजुमदार अरोरा★

12Sep2022

Pitbull Facts : जीव जानवरों से प्रेम करना अच्छी बात है लेकिन याद रखें कि किसी जानवर के ब्रीड, स्वभाव और उनके फ़ितरत को जाने बिना उनके करीब जाना खतरनाक हो सकता है। अक्सर देखा गया है कि कुत्तों में कई नस्ल होते हैं जैसे पॉमेरियन, पूडल, चिहुआहुआ, फ्रेंच बुल डॉग