Category "All Stuff"

22Oct2020

आइस स्केटिंग (Ice Skating) वो खेल है जिसमे बर्फ की चकिनी सतह पर स्टील ब्लडेड स्केट्स की मदद से फिसलते हैं। दुनिया भर के ठन्डे देशों में यह खेल बेहद प्रसिद्द है। कई लोग आइस स्केटिंग को व्यायाम के रूप में करते हैं, यह एक अंतराष्ट्रीय स्तर का खेल है। आइस हाॅकी खेलने के लिये भी आइस स्केटिंग में निपुण होना जरूरी है।

22Oct2020

Safe Diwali Tips : प्रिय बच्चों, हम जानते हैं की आपके लिये दिवाली का मतलब है ढेर सरे पटाखे! पर पटाखे जलाते समय पूरी सावधानी रखें और कोशिश करें की उस समय कोई बड़ा हमेशा आपके साथ है।

17Oct2020

बाल कहानी : (Hindi Kids Story) दीपावली का क्या महत्व है?- दशहरे का त्यौहार अभी बीता भी न था कि पलक झपकते ही दीपावली आ गई। कितनी मधुरता व सौम्यता है इस नाम में इसका अर्थ है ‘दीपों की पंक्ति’ हरिवंशराय बच्चन ने भी कहा है-

15Oct2020

जंगल कहानी (Jungle Story): वनराज की अदालत – बंदर पेड़ों की डालियों पर झूलता हुआ आया और हथौड़ा उठाकर टन-टन-टन से घंटा बजा दिया। जिसकी आवाज सुनकर जंगली जानवर अपनी अपनी फरियाद लेकर बरगद के नीचे वाली अदालत में आ गए।

15Oct2020

प्रेरणादायक बाल कहानी (Inspirational Kids Story) : सेवा का व्रत- प्राचीन काल में गंगा नदी के किनारे एक मुनि का आश्रम था। मुनि का नाम टंडुल था। टंडुल मुनि रात-दिन तप किया करते थे। फलस्वरूप टंडुल मुनि को कई सिद्धियाँ प्राप्त हुई थीं।

एक रात्रि में टंडुल मुनि अपने आश्रम में विश्राम कर रहे थे। अर्द्धरात्रि को लुटेरों का एक दल वहाँ आया। लुटेरों ने नगर के कई मकानों सें सेंध मार कर मूल्यवान वस्तुओं को लूट लिया था। लूट की वस्तुयें उनके पास थी। राजा के सैनिकों ने लुटेरों का पीछा किया तो वे टंडुल मुनि के आश्रम में आकर छुप गये थे। टंडुल मुनि गहरी निद्रा में थे। इसलिए उन्हें लुटेरों के आगमन का कुछ पता नहीं चला। लुटेरों ने रात्रि वहीं बिताने का निश्चय किया और वे सब माल-असबाब के साथ सो गये।

सुबह उठकर टंडुल मुनि का ध्यान सोये हुए लुटेरों की ओर गया तो वे आश्चर्य चकित रह गये। उन्होंने वस्तुयें लूट की देखी तो उन्हें बहुत क्रोध आया और उन्होंने लुटेरों को जगाकर कहा। तुम सब शीघ्र यहाँ से चले जाओ। यदि तुमने भागने में विलम्ब किया तो मैं तुम सबको शाप दूँगा।

Inspirational Kids Story A Vow To Serve

Inspirational Kids Story : बाल कहानी : झूठ का फल

लुटेरे टंडुल मुनि का क्रोध देख भयभीत हो गए और माल-असबाब के साथ भाग खड़े हुए। भाग-दौड़ में एक कलश वहाँ छोड़ गये थे।

टंडुल मुनि ने दूसरे दिन आँगन में कलश पड़ा हुआ देखा तो आश्चर्य चकित रह गये। उन्हें क्रोध आया और उन्होंने कलश उठाया और नदी में फेंक देने के विचार से गंगा नदी की ओर प्रस्थान किया।

रास्ते में विचार किया कि उनका कमंडल छोटा है। फल-वृक्षों को पानी देने में असक्षम है। यदि मैं कलश रख लूँ तो अधिक जल लाकर वृक्षों को सींच सकता हूँ। अच्छा होगा कि मैं यह कलश फैंक देने के बजाये रख लँू। वृक्षों और फूलों को सींचने के लिए इसमें अधिक जल लाया करूगाँ। यह विचार टंडुल मुनि को उपयुक्त लगा और वे कलश लेकर आश्रम वापस लौट गए। उन्होंने नदी से जल लाकर वृक्षों और फल-फूलों को सींचा। मगर आश्चर्य उन्हें तब हुआ जब उन्होंने देखा कि फल,फूल और वृक्ष कुछ ही देर बाद सूख गये। टंडुल मुनि गुस्सा हो उठे। उन्होंने आसन लगाकर साधना की। एक देवता ने प्रकट होकर कहा मुनिराज! यह कलश अनिष्टकारी है। लूट का कलश संग्रह करना हानिकारक है। इसे फेंक दीजिए। इसके जल से तुमने वृक्षों को सींचा है और इसी पाप से वे सब मुरझा गए।

Inspirational Kids Story : चालाक राजा को शिक्षा देती ये बाल कहानी

टंडुल मुनि ने पश्चाताप किया और कलश उठाया, नदी की ओर गये और उन्होंने कलश नदी में फेंक दिया। एक चरवाहा यह देख रहा था। उसने कलश निकाल लिया। उसमें उसने जल भरा और आने-जाने वाले लोगों को निःशुल्क जल पिलाने लगा।

कुछ दिनों में उस चरवाहे की निःशुल्क सेवा और उस कलश की सर्वत्र चर्चा होने लगी। टंडुल मुनि के कानों में भी यह बात आई तो चरवाहे और उस कलश को देखने उस स्थान पर पहुँचे जहाँ वह चरवाहा अपने पशुओं के साथ प्यासे लोगों को निःशुल्क पानी पिलाने में व्यस्त था।

टंडुल मुनि ने उस चरवाहे से पूछा तुम्हें यह कलश कहाँ से प्राप्त हुआ बेटा।

चरवाहे ने टंडुल मुनि को प्रणाम कर कहा। ‘‘मुनिराज मुझे यह कलश गंगा नदी से प्राप्त हुआ था कुछ समय पूर्व। किसी ने कलश गंगा नदी में फेंक दिया था।

टंडुल मुनि ने चरवाहे को कलश-वृतांत सुनाकर कहा। ‘‘बेटा, यह कलश अनिष्टकारी है। इसे फेंक आओ।’’

Inspirational Kids Story A Vow To Serve

Inspirational Kids Story : प्रेरणादायक कहानी : रावण का श्राप

चरवाहे ने कहा। ‘‘मुनिराज! मैं कलश कैसे फेंकू दूँ। इसके जल ने कई प्यासे लोगों और यात्रियों की प्यास बुझाई है। यह अनिष्टकारी नहीं हो सकता और न यह कलश किसी का अहित कर सकता है। इसने कितने ही लोगों की आत्मा को तृप्त किया है। यह कलश तो असंख्य लोगों को जल पिलाकर परोपकार से प्रत्येक वस्तु का गुण बदल जाता है। मुझे भी इसी कलश के कारण मनुष्यों की सेवा करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। मुनिवर, आप तो भलीभाँति जानते हैं। सेवा करना ही वास्तविक धर्म है।’’

चरवाहे की बात सुनकर टंडुल मुनि की आँखें खुल गई। उन्होंने चरवाहे का आभार प्रकट किया और उसी दिन से लोगों की सेवा करने का वचन ले लिया।

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14Oct2020

Diwali Hindi Story for Kids: सुबह-सुबह हम अपनी बैठक में बैठे अखबार पढ़ रहे थे कि हमारे कानों में चर्चा ज्ञान का तकियाक्लाम सुनायी पड़ा- ‘अमां किसकी बनी रही है, किसकी बनी रहेगी।

13Oct2020

लखनऊ । सिटी मोन्टेसरी स्कूल, गोमती नगर (द्वितीय कैम्पस) की मेधावी छात्रा आयुषी सिंह ने उच्च शिक्षा हेतु अमेरिका की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी ऑफ इलिनोईस में चयनित होकर विद्यालय का नाम गौरवान्वित किया है।

13Oct2020

तेरा यार हूं मैं: हम सभी यह मुहावरा सुनते हुए बड़े हुए हैं- द चाइल्ड इज़ द फादर ऑफ द मैन’। लेकिन सच कहूं तो, जब मैं बच्चा था, मेरा हमेशा यही सवाल था कि “असल में इसका मतलब क्या होता है?”

13Oct2020

भारत के मशहूर त्योहार दशहरा (Dussehra) ने हमें हमेशा सिखाया है की अच्छाई और बुराई की लड़ाई में जीत हमेशा अच्छाई की ही होती है। विजयदशमी के नाम से जाने जाने वाला यह त्योहार हिन्दी महीने के आश्विन के दसवे दिन मनाया जाता है, जो ग्रेगोरियन महीनो के हिसाब से सितम्बर या अक्टूबर में पड़ता है।
भारत में विजयदशमी या दशहरा दो वजहों से मनाया जाता हैः

13Oct2020

गुलमर्ग ( Gulmarg) यानी फूलों की चारागाह को उसका नाम 16वी शताब्दी में चाक वंश के सुल्तान युसूफ शाह ने दिया था। गुलमर्ग करोड़ों पर्यटकों को अपनी खूबसूरती की तरफ खींचता है। बाॅलीवुड की कई फिल्मों की शूटिंग भी इस खूबसूरत जगह पर की जा चुकी है। 2650 मीटर की ऊंचाई पर स्थित गुलमर्ग पीरपंजल की बर्फ से ढकी चोटियों से घिरा हुआ है। फूलों का चारागाह और अल्पाइन जंगल इसमें और रंग भरता है।