Category "All Stuff"

15Sep2021

मराठो के सरदार शिवाजी इतिहास में युग पुरूष के नाम से जाने जाते हैं। उन्हें किले जीतने और बनवाने का बड़ा शौक था। जीजी का किला और सामनगढ़ का किला जीत कर इन्होंने नये ढंग से इनका कायाकल्प किया।

14Sep2021

जंगल की कहानी | रोबिन खरगोश की तरकीब:- रोबिन खरगोश अपनी ही मस्ती में चला जा रहा था। उछलना कूदना तो उसकी आदत में ही था। सीधा चलना तो जैसे उसने सीखा ही न था। चलते चलते कंकर पत्थरों को ठोकर मारना और छोटे पौधों के पत्तो पर अपने दांत जमाना उसका शौक था।

13Sep2021

जंगल कहानी : हर हाल में खुश रहने का मंत्र :- एक जंगल में बहुत सारे पशु पक्षी अपने अपने परिवार के साथ रहते थे और बहुत खुश थे। लेकिन एक तोता ऐसा भी था जिसके पास सब कुछ था लेकिन फिर भी वो खुश नहीं रहता था।

8Sep2021

जंगल की कहानी | कौए की किस्मत  :- एक जंगल में पीपल के पेड़ पर एक कौआ रहता था। उसे किसी चीज़ की कमी नहीं थी लेकिन फिर भी उसे  संतोष नहीं था। उसे यही लगता था कि जंगल के सारे पंछी उससे ज्यादा सुंदर और खुश है।

6Sep2021

द गिफ्ट ऑफ द जंगल- यह कितना प्यारा शीर्षक है! यह उपाधि कोडाईकनाल (Kodaikanal) के अलावा और किसी के लिए नहीं है। कोडाईकनाल एक तमिल शब्द है और इसका अर्थ है ‘द गिफ्ट ऑफ द फाॅरेस्ट’। कोडाईकनाल की सुंदरता अवर्णनीय है

4Sep2021

Dracula Ant: जीव जगत में गति के मामले में एक नया अभूतपूर्व रिकाॅर्ड बना हैं। ‘Dracula Ant’ की एक प्रजाति के जबड़े 0.000015 सैकेंड में शून्य से 250 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हरकत कर सकते हैं।

‘मिस्ट्रियम कैमिलेई’ नामक इस चींटी की प्रजाति के हाई-स्पीड वीडियो से खुलासा हुआ है कि इसके जबड़े मानव आंखों की पलकें झपकने से भी 5,000 गुना तेजी से हरकत कर सकते हैं।

चींटियों की यह दक्षिण-पूर्व एशिया के उष्णकटिंबधीय इलाकों में पाई जाने वाली एक दुर्लभ प्रजाति है जिसके बारें में अब तक नाममात्र जानकारी जुटाई गई हैं।

‘राॅयल सोसायटी ओपन सांइस’ नामक जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार इसके जबड़े सभी जीवों से सबसे तेजी से झटका दे सकते हैं।

इलिनोइस विश्वविद्यालय के एंड्रयू सुआरेज बताते हैं, ‘‘ये चींटियां अन्य कीटों को मारने के लिए अपने जबड़ों से वे उन्हें जबरदस्त झटका मारती हैं और संभवतः इस हमले से वे उन्हें चैंका देती हैं और फिर उस शिकार को वे अपनी बांबियों में ले जाती हैं जहाँ उन्हें नन्हे लार्वा को खिलाया जाता है।

चंूकि इनके जबडों की रफ्तार बेहद तीव्र है इसलिए इसे कैमरे पर रिकाॅर्ड कर पाना भी कोई आसान काम नहीं था।

इसके लिए वैज्ञानिकों को बेहद शक्तिशाली तथा तेज कैमरों की मदद लेनी पड़ी ताकि इन चीटिंयों के जबड़ों की सारी हरकत को फिल्माया जा सके। इसके लिए एक्स-रे इमेंजिंग टैक्नोलाॅजी का भी इस्तेमाल किया गया।

ये चींटियां अपने जबड़ों से झटका देने के लिए कुछ-कुछ उंगलियों से चुटकी बजाने जैसी तकनीक का उपयोेग करती हैं। इनके जबड़े अन्य चींटियों की तुलना में अधिक चैड़े तथा लचीले होते हैं। वे जबड़ों के अगले हिस्सों को आपस में जोर से जोड़ लेती हैं जिससे उनमें भीतर की ओर तेज दबाव पैदा हो जाता है और यह सारी ताकत तब छूट जाती है जब एक जबड़ा दूसरे से ठीक ऊपर से सरका दिया जाता है। ठीक वैसे ही जैसे हम उंगलियों से चुटकी बजाते हैं

हाई स्पीड वीडियो रिकाॅर्ड में इनके जबड़ों की गति 250 किलोमीटर प्रतिघंटा तक रिकाॅर्ड की गई है जो धरती पर पाए जाने वाले सभी जीवों में सर्वाधिक है।
वैसे वैज्ञानिकों को लगता है कि धरती पर इनसे भी तेज गति से हरकत कर सकने वाली चींटियों तथा दीमकों की प्रजातियाँ मौजूद हैं जिन्हें अभी तक खोजा नहीं जा सका है।

इसलिए पड़ा ‘ड्रैकुला’ नाम

‘मिस्ट्रियम कैमिलेई’ चींटियों की ‘Dracula Ant’ प्रजाति का हिस्सा हैं। इनका यह नाम इसलिए पड़ा है क्योंकि इस प्रजाति की रानी चींटियां अपने ही लार्वा का खून पीकर जीती हैं।

2Sep2021

एयरफोर्स पायलट से एस्ट्रोनाॅट

बात अप्रैल 1984 की है। तब प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी (Indira Gandhi)  थी। उन्होंने जब अंतरिक्ष में मौजूद राकेश शर्मा से वीडियो काॅलिंग के जरिए पूछा कि ऊपर से हिंदुस्तान कैसा दिखता है, तो स्काॅवर्डन लीडर शर्मा बोलेः मैं बिना किसी हिचक के कह सकता हूँ सारे जहां से अच्छा….।

राकेश शर्मा पहले भारतीय थे, जिन्हें अंतरिक्ष में जाने का मौका मिला। उनका जन्म 13 जनवरी 1949 को पंजाब के पटियाला में हुआ था। उन्हें बचपन से ही हवाई जहाजों में दिलचस्पी थी। 1966 में बतौर अफसर उन्होंने इंडियन एयरफोर्स ज्वाॅइन की। 1971 के वाॅर में फाइटर पायलट के रूप में राकेश शर्मा ने बेहतरीन प्रदर्शन किया। 1984 में उन्हें सोवियत संघ और भारत के ज्वांईट स्पेस प्रोग्राम के लिए चुना गया।

2 अप्रैल 1984 को दो सोवियत एस्ट्रोनाॅट्स के साथ सोयूज टी-11 राकेश शर्मा अंतरिक्ष में गए। वह कुल 7 दिन, 21 घंटे और 40 मिनट अंतरिक्ष में रहे। अंतरिक्ष में जाने से एक साल पहले वह माॅस्को से 70 किमी दूर स्टार सिटी गए थे। यहीं पर अंतरिक्ष-यात्रियों की ट्रेनिंग रूसी भाषा में होनी थी इसलिए वह रोजाना 6-7 घंटे रूसी भाषा सीखते थे और करीब तीन महीने में उन्होंने ठीक-ठाक रूसी सीख ली थी। इसके साथ ही जीरो ग्रैविटी में काम करने की महीनों लंबी ट्रेनिंग भी पूरी की जैसे कि पैर ऊपर और सिर नीचे रखकर सोना, बिना पानी के ब्रश करना आदि। उन्होंने इतिहास रच दिया। हाल में उन पर फिल्म बनाने का ऐलान भी किया गया है। फिल्म का नाम होगा ‘सारे जहाँ से अच्छा’ फिलहाल राकेश शर्मा अलग-अलग संस्थानों में मोटिवेशनल लेक्चर देते हैं।

देसी तकनीक से छाए अंतरिक्ष में

राकेश शर्मा अंतरिक्ष में रूस की मदद से गए थे लेकिन आप शायद जानते होंगे कि दिसंबर 2021 में भारत पूरी तरह से अपने दम पर अंतरिक्ष में इंसान भेजना चाहता है। इसके लिए प्रोजेक्ट गगनयान पर जोर-शोर से काम चल रहा है। अनुमान है कि इस प्रोजेक्ट पर करीब 10 हजार करोड़ रूपये खर्च होंगे। गगनयान प्रोजेक्ट सफल होने पर इंसान को अंतरिक्ष भेजने वाला भारत चैथा देश बन जाएगा। इससे पइले रूस, अमेरिका और चीन यह काम कर चुके हैं।

आप भी बन सकते हैं

अगर आप भी तारों भरे आकाश में सैर करना चाहते हैं तो आपको एस्ट्रोनाॅट बनना होगा। हाँ, इसके लिए बड़े होकर आपको मैथ्स, फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलाॅजी, मेडिकल, इंजीनियरिंग या कंप्यूटर साइंस जैसे सब्जेक्ट्स में गै्रजुएशन या मास्टर्स डिग्री (एम एस सी, एक ई) लेनी होगी। अगर प्लेन उड़ाने का एक हजार घंटे या ज्यादा का अनुभव आपके पास होगा, तो भी काम बन जाएगा। साथ ही, अंतरिक्ष-यात्री बनने के लिए फिजिकली और मंेंटली फिट होना बहुत जरूरी है। हेल्थ, फिटनेस, मेंटल, लेवल, दिमागी कुशलता आदि के लिए कई लेवल पर टेस्ट होते हैं। अगर आप इन सबमें पास हो गए और आपका चयन बतौर एस्ट्रोनाॅट हो गया तो करीब 2-3 लंबी ट्रेनिंग लेनी होगी। इसमें प्रेशरसूट पहनने, लाॅचिंग के वक्त पैदा होने वाले भीषण शारीरिक दबाव को सहने, अंतरिक्ष स्टेशन में रूटीन के काम करना, अंतरिक्ष की मरम्मत आदि सिखाया जाता है तो फिर देर किस बात की, तैयारी शुरू की जाए।

27Aug2021

Sleep Hygiene: पूर्वस्कूली उम्र (रात में 10 से 13 घंटे) किशोर तक (8 से 10 घंटे)
 सोने का एक समय निर्धारित करें।
 स्कूल की रातों और गैर-स्कूली रातों के बीच का समय और जागरण का समय एक ही होना चाहिए।
 एक दिन से दूसरे दिन एक घंटे के अंतर से अधिक नहीं होना चाहिए।

23Aug2021

Bhimrao Ramji Ambedkar: भीमराव रामजी आम्बेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को मध्य प्रदेश में हुआ था। उन्होंने अछूतों (दलितों) के सामाजिक भेदभाव के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया था। वह भारत के संविधान के वास्तुकार थे, जो 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ।

19Aug2021

सुपरमैन हमेशा उड़ता नहीं था
मूल काॅमिक किताब में सुपरमैन एक ही बार में ऊंची इमारतों पर छलांग लगा सकता है, लेकिन फिर उसे सीधे धरती पर वापस आना पड़ा,