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“चिड़िया” एक प्यारी और मनोरंजक हिंदी बाल कविता है, जो बच्चों को जानवरों की आवाज़ों और उनके स्वभाव से मज़ेदार तरीके से परिचित कराती है। इस कविता में चिड़िया, भालू, कुत्ता और बिल्ली जैसे जानवर अपने-अपने अंदाज़ में आते हैं और बच्चों के लिए दृश्य को जीवंत बना देते हैं। चूँ-चूँ, ढप-ढप, भौं-भौं और म्याऊँ जैसी ध्वनियाँ बच्चों की कल्पनाशक्ति को बढ़ाती हैं और कविता को यादगार बनाती हैं।
यह कविता खास तौर पर नर्सरी, केजी और कक्षा 1–2 के बच्चों के लिए उपयुक्त है। जानवरों की आवाज़ों के ज़रिए बच्चे न सिर्फ़ नए शब्द सीखते हैं, बल्कि उनकी भाषाई समझ (language development) और श्रवण क्षमता (listening skills) भी बेहतर होती है। कविता बच्चों को लय, ताल और उच्चारण का अभ्यास भी कराती है।
आज के डिजिटल दौर में, ऐसी सरल और मौखिक कविताएँ बच्चों को किताबों से जोड़ने में अहम भूमिका निभाती हैं। शिक्षक इस कविता को classroom activity, rhymes session और oral recitation में इस्तेमाल कर सकते हैं। माता-पिता भी इसे घर पर पढ़ाकर बच्चों के साथ सीखने का आनंद ले सकते हैं। सरल भाषा और चंचल भाव इसे एक आदर्श बाल कविता बनाते हैं।
कविता: चिड़िया
चूँ-चूँ करती आयी चिड़िया,
दाल का दाना लायी चिड़िया।
ढप-ढप करता आया भालू,
ढोल उठा कर लाया भालू।
भौं-भौं करता आया कुत्ता,
म्याऊँ-म्याऊँ करती आयी बिल्ली।
दूध का कटोरा लायी बिल्ली।
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