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चूहा कविता: नए साल का संकल्प और मज़ेदार बाल कविता

“चूहा और नए साल का संकल्प” एक मज़ेदार, चुटीली और सीख से भरी बाल कविता है, जो बच्चों को हँसाते-हँसाते एक प्यारा संदेश देती है। इस कविता में चूहा नए साल के मौके पर अपनी सेहत बनाने का संकल्प लेता है।

By Lotpot
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“चूहा और नए साल का संकल्प” एक मज़ेदार, चुटीली और सीख से भरी बाल कविता है, जो बच्चों को हँसाते-हँसाते एक प्यारा संदेश देती है। इस कविता में चूहा नए साल के मौके पर अपनी सेहत बनाने का संकल्प लेता है। वह मज़ाकिया अंदाज़ में सोचता है कि अब वह इतना ताक़तवर बनेगा कि बिल्ली से डरना नहीं पड़ेगा। लेकिन जैसे ही बिल्ली की “म्याऊँ” सुनाई देती है, चूहा तुरंत समझदारी दिखाता है और घर जाकर कसरत करने का फैसला करता है।

यह कविता बच्चों को यह सिखाती है कि बड़े-बड़े दावे करने से ज़्यादा ज़रूरी है सही समय पर सही फैसला लेना। चूहे का डरना कायरता नहीं, बल्कि उसकी समझदारी को दर्शाता है। यही बात बच्चों के लिए महत्वपूर्ण सीख बन जाती है कि ताकत सिर्फ शरीर से नहीं, सोच और समझ से भी आती है।

नए साल के संकल्प, सेहत, कसरत और हास्य को जोड़कर यह कविता बच्चों के मन को तुरंत आकर्षित करती है। नर्सरी और प्राइमरी कक्षा के बच्चों के लिए यह कविता कविता-पाठ, अभिनय और हास्य गतिविधियों के लिए बहुत उपयोगी है। शिक्षक इसे “नया साल”, “स्वास्थ्य” और “अच्छे फैसले” जैसे विषयों से जोड़कर पढ़ा सकते हैं।

सरल भाषा, जानवरों के पात्र और मज़ेदार मोड़ इस कविता को बच्चों के लिए यादगार बनाते हैं। “चूहा और नए साल का संकल्प” हँसी के साथ समझदारी की सीख देने वाली एक बेहतरीन बाल कविता है।

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चूहा और नए साल का संकल्प

चूहा बोला नए साल में,
ऐसी हेल्थ बनाऊँगा।

बहुत सताया है बिल्ली ने,
उसको कच्चा खाऊँगा।

तभी सुनाई पड़ी दूर से,
बिल्ली जी की म्याऊँ।

चूहा बोला चलता हूँ घर,
करके कसरत आऊँ। 

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