हिंदी नैतिक कहानी: योग्य राजा का चुनाव
राजा रामप्रताप अपने तीन पुत्रों में से किसी एक को अपना उत्तराधिकारी बनाना चाहते थे। इस कहानी में दिखाया गया है कि एक सच्चा राजा न केवल वर्तमान को समझता है, बल्कि भविष्य की सोच भी रखता है।
राजा रामप्रताप अपने तीन पुत्रों में से किसी एक को अपना उत्तराधिकारी बनाना चाहते थे। इस कहानी में दिखाया गया है कि एक सच्चा राजा न केवल वर्तमान को समझता है, बल्कि भविष्य की सोच भी रखता है।
एक गरीब और एक अमीर भाई के बीच एक दिलचस्प कहानी है जिसमें गरीब भाई की कठिनाइयों और चालाकी की चर्चा है। जज लालच में आकर गरीब भाई के पक्ष में फैसला देता है। अंत में, गरीब भाई अमीर भाई से पैसे लेकर घोड़ा लौटा देता है और व्यापारी से भी मुआवजा प्राप्त करता है।
प्राचीन काल में सीतारामपुर नामक एक गांव था। उस गांव में एक वृद्ध दम्पति रहा करते थे। लकड़ियाँ काट कर वे किसी तरह अपना गुजारा करते थे। गरीब होने के बावजूद वे ईमानदार थे। उनके पड़ोस में एक दुष्ट सेठ रहता था।
अम्मा मोहल्ले की कोई सामान्य वृद्ध महिला नहीं थी। आस पड़ोस के सभी बच्चे और स्त्रियां उन्हे सम्मान पूर्वक अम्मा कह कर सम्बोधित करते थे। वे अपने बेटे और पुत्र वधु के साथ रहती थीं।
कठिन परिस्थितियों में हम सभी आम तौर पर बाहर से सहायता की अपेक्षा करते हैं। अधिकतर लोग यह नहीं जानते कि समस्या का समाधान उनके स्वंय के अन्दर ही निहित है।
सामान्य दृष्टि वाले लोग अक्सर वह सब कुछ नहीं देख पाते जो उनके सामने होता है। इसके विपरीत वे लोग जो दृष्टि विहीन होते हैं अपने सामने की सभी वस्तुओ को ध्यान पूर्वक अपने ज्ञान में समा लेते हैं।
केवल पुस्तकें पढ़ लेने से ही कोई व्यक्ति अच्छे रूप से ज्ञानी नहीं हो जाता। जीवन में कई अन्य कुशलताओं का भी उतना ही महत्व है। प्रोफेसर राव को इस बात का ज्ञान काफी समय के बाद हुआ।