मजेदार हिंदी कहानी: राम जी का डिब्बा
किसी शहर के एक मोहल्ले में एक बूढ़ी औरत बिलकुल अकेले रहती थी। मोहल्ले में सभी उन्हें ताई जी कहते थे। वे एक बेवा थीं और उनकी आवश्यकताएं न्यूनतम थीं।
किसी शहर के एक मोहल्ले में एक बूढ़ी औरत बिलकुल अकेले रहती थी। मोहल्ले में सभी उन्हें ताई जी कहते थे। वे एक बेवा थीं और उनकी आवश्यकताएं न्यूनतम थीं।
महाराजा कृष्णा देव राय को एक बार एक अनोखा उपहार मिला। विदेश से आए एक सौदागर ने उन्हें कुछ सुन्दर बिल्लियां भेट में दीं। महाराज ने सौदागर को धन्यवाद कहा और राज्य की ओर से सौ स्वर्ण मुद्रिकायें उपहार स्वरूप भेंट कीं।
नरेश के विवाह की सारी तैयारियाँ पूरी हो चुकीं थीं। उसने एक नयी शेरवानी अनिवार्यता बनवाई थी। जब वह अपने कपड़ों को चैक कर रहा था तभी अक्समात उसे पता लगा कि एक वस्त्र तो वह भूल ही गया है।
गर्मी की एक शाम नसरू घर के बाहर पेड़ के नीचे आराम कर रहा था। तभी उसे कुछ खटपट सुनाई दी। उसने मुड़ कर देखा तो उसके आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा। एक चोर उसके मकान में घुस रहा था।
सुमित पूरे चार महीने के बाद अपने दादा-दादी के पास आया था। पर दादा-दादी एक बात से बहुत परेशान थे कि जबसे वह आया है तब से या तो वीड़ियो गेम खेलता रहता है या फिर टीवी पर कार्टून्स देखता रहता है।
रहमत की ऊंटनी उसके लिए मरूस्थल का जहाज थी। वह एक छोटा व्यापारी था जो राजस्थान के एक गांव में रहता था उस का कारोबार अच्छा चल रहा था और उसने कुछ धन भी इकट्ठा कर लिया था।
एक सेठ था वह बड़ा ही कंजूस था जीवन में उसने बहुत धन कमाया पर कौड़ी-कौड़ी दांत में दबाकर रखी। कभी किसी को एक भी पैसा नहीं दिया। यहां तक कि अपने बीवी बच्चों को भी पैसे को हाथ न लगाने दिया।