हिंदी मजेदार कहानी: मुन्ना मियां का इम्तिहान
दोस्तों यूं तो इस घटना को बीते अनेक साल हो चुके हैं लेकिन हर साल इम्तिहान का मौसम आते ही यह घटना याद आ जाती है और मन लोटपोट हो जाता है। उस स्कूल में जब हमने दाखिल लिया और पहले दिन क्लास में पहुंचे।
दोस्तों यूं तो इस घटना को बीते अनेक साल हो चुके हैं लेकिन हर साल इम्तिहान का मौसम आते ही यह घटना याद आ जाती है और मन लोटपोट हो जाता है। उस स्कूल में जब हमने दाखिल लिया और पहले दिन क्लास में पहुंचे।
बादशाह शाहजहां के चार लड़के थे- दारा, शुजा, मुराद और औरंगजेब। इनमें से किसी को राज्य का उत्तराधिकारी बनाना था। बादशाह ने स्वयं कई दिनों तक इस प्रश्न पर विचार किया।
प्राचीन काल में यज्ञदत्त नामक एक वेद ब्राहमण थे। उन्होंने अपने ज्ञान और प्रतिभा से पर्याप्त सम्पत्ति भी अर्जित की थी। उसकी पत्नी भी सुन्दर, सुशील तथा सुशिक्षित थी। उनके एक पुत्र था गुणनिधी।
एक बार मास्टर हरीरामजी को नौकर की आवश्यकता पड़ी। उन्होंने शहर में ढिंढोरा पिटवा दिया कि एक नौकर की आवश्यकता है। यह खबर शहर में जंगल की आग की तरह फैल गई।
मई की पच्चीस तारीख, शाम के पांच बजे पिद्दी पहलवान यानी पदमश्री लाल अपने परम मित्र हलवाई पुराणमल की दुकान पर आकर बैठ गये। अभी-अभी वे धन्नूमल के अखाड़े से कुश्तियां देख कर आ रहे थे।
आधी रात का समय था। पूरे मोहल्ले में सन्नाटा छाया हुआ था, लेकिन रामभरोसे की उस समय नींद टूटी हुई थी। आलम यह था कि गर्मियों के दिन थे और रामभरोसे अपने घर के बाहर एक पेड़ के नीचे सोये हुए थे।
भईया लाल एक डरपोक किस्म के व्यक्ति थे। भूत-प्रेत, जादू-टोना, बस इन्ही को लेकर वह अक्सर परेशान रहते थे। क्योंकि बचपन से ही वह एक ऐसे माहौल में रहे थे जहां पर हमेशा ऐसी अन्धविश्वासी बातों का जिक्र चल जाया करता था।