बाल कहानी : अभी देर नहीं हुई...
प्रताप और प्रकाश बचपन से साथ पढ़े थे। प्रताप आजकल दिल्ली में नौकरी कर रहा था प्रकाश अपने पुराने शहर में ही रह रहा था प्रकाश अपने दफ्तर के काम से दिल्ली आया था। अपना काम खत्म कर के उसने कुछ समय अपने दोस्त के साथ बिताया।
प्रताप और प्रकाश बचपन से साथ पढ़े थे। प्रताप आजकल दिल्ली में नौकरी कर रहा था प्रकाश अपने पुराने शहर में ही रह रहा था प्रकाश अपने दफ्तर के काम से दिल्ली आया था। अपना काम खत्म कर के उसने कुछ समय अपने दोस्त के साथ बिताया।
एक बार की बात है, कौशलपुरी राज्य के राजा राघवेंद्र सिंह शिकार खेलने के लिए जंगल में गए। लेकिन वहां रास्ता भटक गए और भूख-प्यास से व्याकुल होकर एक वनवासी की झोपड़ी तक जा पहुँचे।
इस कहानी में चिंटू नामक एक छोटे लड़के की यात्रा को दर्शाया गया है, जो अपने दोस्त के साथ खिलौने अदला-बदली करता है। इस दौरान उसे सच्चाई और ईमानदारी का महत्व समझ में आता है।
एक बार राजा मान सिंह ने राज्य में अंधे लोगों को भीख देने का फैसला किया। यह सुनिश्चित करने के लिए कि कोई अंधा व्यक्ति भीख लेने से छूट न जाए।
दीपावली के चार दिन रह गए थे लोटपोट के सभी बच्चों में उत्साह था। सबको अपने अपने घर से आतिशबाजी खरीदने के लिए पैसे मिल चुके थे। वीनू और टीनू को भी।
अरी सुन! किसान ने पत्नी को पुकारा और बाल्टी में चूना घोलने लगा। पत्नी आवाज़ सुनकर आ गयी और किसान के कामों में सहयोग करने लगी। उसकी दो बेटियां भी थीं- फूलमती और वीरमती!
उस दिन की दोपहर झामू (घर का नौकर) के लिए काफी व्यस्त थी क्योंकि वो पूरा दिन मूर्ति के पीछे भागता रहा। मूर्ति बड़ा ही शरारती बच्चा था और वो कभी किसी का कहा नहीं मानता था।